राज्य-संचालित के सभी मदरसों और संस्कृत टोल्स या संस्कृत केंद्रों को बंद करने का लिया गया निर्णय

राज्य-संचालित के सभी मदरसों और संस्कृत टोल्स या संस्कृत केंद्रों को बंद करने का लिया गया निर्णय

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B y Poonam Rajpoot

असम सरकार ने राज्य-संचालित के सभी मदरसों और संस्कृत टोल्स या संस्कृत केंद्रों को बंद करने का निर्णय लिया है । असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया था । सरकार द्वारा संचालित या फंडेड मदरसों और टोल्स को अगले पांच महीनों के भीतर नियमित स्कूलों के रूप में दोबारा गठन किया जाएगा । ऐसा इसलिए है क्योंकि एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का काम धार्मिक शिक्षा प्रदान करना ही नहीं बल्कि,. हम धार्मिक शिक्षा के लिए सरकारी फंड ख़र्च नहीं कर सकते है इसके लिए नवंबर में एक अधिसूचना जारी की जाएगी । “

तों वहीं प्रदेश में चल रहे प्राईवेट मदरसों के बारे में शिक्षा मंत्री का कहना रहा कि देश में चल रहे मदरसों स्कूल से कोई परेशानी नहीं है लेकिन मदरसों को दिए गए दिशा निर्देशों के अंदर ही पढ़ाया जाए ।लेकिन प्राइवेट मदरसों को भी एक नियामक ढाँचे के भीतर चलाना होगा. इसके लिए जल्द ही हम एक क़ानून ला रहे हैं ।”

बीजेपी की तरफ से मदरसों को बंद करने के फैसले से असम में खलबली मची हुई हैं। मदरसे स्कूल इस बात से सहमत नहीं है कि उनके स्कूलों को बद किया जाए । असम की सत्त संभाल रही बीजेपी सरकार द्वारा मदरसों को बंद करने का फ़ैसला ऐसे समय में सामने आया है जब अगले पाँच महीने में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसें में असम के लोग वहां कि राजनिति को समझने में लगे हुए है । असम में 600 से ज्यादा मदरसे स्कूल है, जिनमें लगभग 1 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ रहे है ।

ऐसे में मदरसों को बंद करना मतलब छात्रों के भविष्य के साथ खेलना होगा। असम के मदरसों की हालता का जिम्मा जहां बीजेपी पर लगाया जा रहा तो वही बीजेपी पार्टी के सदस्य हिमंत बिस्वा सरमा पर भी कई सवाल किये जा रहे है। हिंमत पर इलज़ाम लगाया जा रहा है कि जब ये कांग्रेस के सदस्य थे तब उन्होेंने उस समय मदरसों की सहायता के लिए 20 करोड़ रूपए दिये थे लेकिन जबसे हिंमत ने बीजेपी पार्टी का दामन थामा है तब से वह बदल चुके हैं।


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