मोहम्मद शहाबुद्दीन की उम्रकैद की सजा रहेगी  बरकरार , पटना हाई कोर्ट ने लगाई मुहर

मोहम्मद शहाबुद्दीन की उम्रकैद की सजा रहेगी बरकरार , पटना हाई कोर्ट ने लगाई मुहर

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By Poonam Rajpoot

पटना हाई कोर्ट के 30 अगस्त, 2017 को दिए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अब ताउम्र के लिए मोहम्मद शहाबुद्दीन को सजा का ऐलान कर दिया हैं । जिसके चलते मोहम्मद शहाबुद्दीन को सारी उम्र जेल में रहने का आदेश दिया गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने 2004 में हुए दो भाइयों को तेजाब से नहला देने के कत्ल के मामले में सजा सुनाई गई है। यह पूरा मामला बिहार के प्रतापपुर गांव का है। आपको बता से साल 2014 में शहाबुद्दीन और उसके लोगों ने रंगदारी न देने पर सीवान के प्रतापपुर गांव में चंदा बाबू के दो बेटों सतीश और गिरीश रौशन को तेजाब डालकर जिंदा जला दिया था । इससे पहले भी इस मामले में मोहम्मद शहाबुद्दीन समेत चार लोगों को पटना हाई कोर्ट ने 9 दिसंबर 2015 को सिवान की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी ।

अस्सी के दशक में बिहार का सीवान जिला तीन लोगों के लिए जाना जाता था. भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, सिविल सर्विसेज़ टॉपर आमिर सुभानी और ठग नटवर लाल. राजेंद्र प्रसाद सबके सिरमौर थे. आमिर उस समय मुसलमान समाज का चेहरा बने हुए थे. और नटवर के किस्से मशहूर थे. उसी वक़्त एक और लड़का अपनी जगह बना रहा था. शहाबुद्दीन. जो कम्युनिस्ट और बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ खूनी मार-पीट के चलते चर्चित में आया था. इतना कि मोहम्मद शहाबुद्दीन को शाबू-AK 47 नाम से जाना जाने लगा । 1986 (छियासी) में हुसैनगंज थाने में इस पर पहली FIR दर्ज की गई थी. आज उसी थाने में ये A-लिस्ट हिस्ट्रीशीटर है. मतलब वैसा अपराधी जिसका सुधार कभी नहीं हो सकता ।

23 की उम्र में 1990 में मोहम्मद शहाबुद्दीन बिहार का विधायक भी बना था । उस समय लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पक्की कर रहे थे । मोहम्मद शहाबुद्दीन के 23 की उम्र में ही विधायक बना देने पर भी विवाद बनाया गया था। क्योकि विधायक पद के लिए कम से कम 25 उम्र होना जरूरी होता है। फिर ये अपराधी दो बार विधायक बना और चार बार सांसद । और 1996 में मोहम्मद शहाबुद्दीन केन्द्रीय मंत्री बनते-बनते रह गया था । क्योंकि मोहम्मद शहाबुद्दीन का एक केस खुल गया था । लालू को जिताने के लिए इसकी जरूरत बहुत पड़ती थी । उनके लिए ये कुछ भी करने को तैयार था. और लालू इसके लिए. इसी प्रेम में बिहार में अपहरण एक उद्योग बन गया. सैकड़ों लोगों का अपहरण हुआ है . बिजनेसमैन राज्य छोड़-छोड़ के भाग गए. कोई आना नहीं चाहता था. इसी दौरान और भी कई अपराधी आ गए.


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