शाहीन बाग की शेरनी की अनसुनी कहानी खुद उन्हीं की जुबानी

दिल्ली में पैदा हुई आरफा के पिता पेशे से डॉक्टर थे। उन्होंने वकालत करने का फैसला लिया। आरफा ने हमें बताया, कि दसवीं कक्षा में  पढ़ती थी। जब वो तभी से एनजीओ से जुड़ने का प्रयास कर रही थी और तभी से आरफा झुग्गियों के बच्चों को पढ़ाने जाती थी।

उसी समय और आरफा ने ठान लिया था कि उनको बड़े होकर समाजसेवा के कामों में अपना योगदान देना है।  दिल्ली में स्कूलिंग करने के बाद ग्रेटर नोएडा की लॉयड लो स्कूल से वकालत की पढ़ाई की, वह सेशन कोर्ट हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के खिलाफ़ अपराध के मामलों में केस लड़ते है।

आर व महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों को बताने के लिए काफी लंबे समय से कार्य कर रही है 2014 में उन्होंने प्रत्येक कदम नामक सामाजिक संस्था शुरू की थी। महिलाओं के साथ होने वाले शारीरिक शोषण और घरेलू हिंसा के खिलाफ़ मुकदमे लड़ती है। हम आपको बता दे और आरफा की एक छोटी बहन भी है।

साथ ही साथ आरफा खानम सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ साथ कांग्रेस पार्टी की सदस्य भी है।आरफा खानम शाहीन बाग के जी ब्लॉक में अपने परिवार के साथ रहती है। हम आपको बता दे दिल्ली में जो अतिक्रमण  का कार्य चल रहा है यह कार्य आरफा खानम के घर के सामने से ही शुरू होना था।

 आरफा खान ने हमें बताया की यह अतिक्रमण का मामला सुबह 9:30 बजे से शुरू हुआ।पहले एमसीडी द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए सिर्फ एक टेंपो खड़ा था,जिसे सड़क के किनारे अवैध जगह पर लगे अवैध बोडो को हटाने के लिए लाया गया था।

 तभी एक बुलडोजर लगभग 10:30 बजे शाहीन बाग में आता है, जब शाहीन बाग के स्थानीय लोग एमसीडी के ऑफिस अधिकारियों से मिलने पहुंचे, तो उस वक्त अतिक्रमण हटाने जो बुलडोजर आया था, उसके साथ नगर निगम का एक भी सदस्य या अधिकारी नहीं था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के लिए पहले जो नोटिस देना चाहिए ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। जीन स्थानीय लोगों का नाम लिस्ट में नहीं था उन लोगों की दुकानें भी अतिक्रमण के दौरान तोड़ दी गई।

 स्थानीय लोगों को डर था कि जहांगीर पूरी की तरह मामला कोर्ट मे न पहुँच जाए, उस मामले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्टे जारी किया जिसके दौरान अतिक्रमण को रोक दिया गया था।

आरफा खानम ने हर बार विरोध प्रदर्शन करने में हिस्सा लिया है। इससे पहले शाहीन बाग के चर्चित एनआरसी धरने में भी हिस्सा ले चुकी है। 100 दिन से ज्यादा चलने वाले इस धरने में शाहीन बाग की महिलाओं ने सड़क को ब्लॉक कर दिया थाऔर उस समय भी आरफा खान ने धरने का समर्थन किया और सरकार के विरोध में नारेबाजी की।

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